कभी जींस पहनने पर लड़कों ने किया था कमेंट,अब किरण बेदी को गार्ड ऑफ हॉनर देंगी

लखनऊ. यूपी के मुजफ्फरनगर की रचना सिंह को P.hd (हिंदी लिटरेचर) में गोपाल दास मेमोरियल गोल्‍ड मेडल दिया गया। कॉलेज लाइफ में छेड़छाड़ का शिकार हो चुकीं रचना IPS ऑफिसर हैं। आगामी 26 जनवरी को लेफ्टिनेंट गवर्नर किरण बेदी को रचना दिल्‍ली में गार्ड ऑफ हॉनर देंगी।हाल में हुए लखनऊ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में रचना सिंह आकर्षण का केंद्र बनी।
– राज्‍यपाल राम नाइक ने इस आईपीएस अफसर को हिंदी लिटरेचर में गोल्ड मेडल दिया।
– कॉलेज की बात याद करते हुए रचना कहती हैं- मैं लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन कर रही थी।
– एक दिन पार्किंग में गाड़ी खड़ी कर रही थी, मैंने जीन्स पहना हुआ था। पार्किंग में मौजूद 4-5 लड़कों ने मुझे देख भद्दा कमेंट करना शुरू कर दिया।
– उस समय मैंने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन जब डिपार्टमेंट पहुंची तो अपने दोस्तों को इकट्ठा किया और बाहर आई।
– मैंने दोबारा से उन लड़कों से पूछा- क्या कमेंट्स किया था, उसके बाद एक को खींचकर थप्पड़ जड़ दिया।
– दोस्तों को इसलिए इकटठा किया था, ताकि अगर कुछ उल्टा हो, तो वो मेरे सपोर्ट में खड़े रहें।
– हालांकि, मेरे थप्‍पड़ का उन लड़कों ने कोई जवाब नहीं दिया और वापस चले गए। उसके बाद किसी भी लड़के की मुझसे बात करने की हिम्‍मत नहीं होती थी।

.तो इसलिए हमेशा याद रहेगा UPSC में सिलेक्‍शन
– रचना कहती हैं- मैं जाट कम्‍युनिटी से बिलॉन्‍ग करती हूं, जहां लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र में कर दी जाती है।
– मेरे बारे में भी रिश्‍तेदार ऐसी ही बात करते थे और फैमिली से कहते थे बेटी को कितना पढ़ाओगे, शादी कब करोगे।
– लेकिन पापा ने मेरा सपोर्ट किया। उन्‍होंने मुझे कभी भी किसी चीज के लिए रोका-टोका नहीं।
– पहली बार जब UPSC के फॉर्म में IPS भरा, तो पापा ने पूछा कि IAS क्‍यों नहीं भरा।
– मैंने जवाब दिया कि मैं IPS बनना चाहती हूं, क्यूंकि मैं कहीं न कहीं किरण बेदी से बहुत प्रभावित थी।
– हालांकि, पहली बार में क्वालिफाई नहीं कर पाई, तो पापा ने कहा- दोबरा एग्‍जाम दो।
– इसी बीच मेरी शादी हो गई। लेकिन पति और ससुरालवालों के सपोर्ट के दम पर मैंने दोबरा से UPSC एग्‍जाम दिया।
– तीसरी बार में मेरा सिलेक्शन हो गया। सबसे बड़ी बात ये थी कि साल 2011 में जब मेरा सिलेक्‍शन हुआ, उस समय मैं प्रेग्नेंट थी। इसीलिए लेट में ज्वाइन किया। वो समय मुझे हमेशा याद रहेगा।
– एग्‍जाम देते समय मेरे अंदर कास्‍ट का भी डर रहता था। मैं जनरल कास्ट की थी, इसलिए लगता था UPSC क्वालिफाई नहीं कर पाऊंगी।
– इसलिए मैंने रिसर्च डाला था कि अगर सिलेक्‍शन नहीं हुआ तो एकेडमिक में चली जाऊंगी। लेकिन मेरा सपना पूरा हो गया।
‘कई बार केस सॉल्‍व करने में उलझ गई थी’
रचना कहती हैं- मेरी पोस्टिंग इस समय पांडिचेरी में है। सर्विस पीरियड में बहुत सारे केसे ऐसे आए जिसमे मैं उलझ कर रह गई, लेकिन उन केस को सॉल्‍व करने के लिए मुझे अवॉर्ड भी मिला। बेस्ट एसपी का अवॉर्ड भी मिल चुका है।

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