एक शाम ध्यान के दौरान मेरा दिल खिल उठा और उसने मेरे जीवन ज्ञान से भर दिया:रूचिवर्धन मिश्रा

रूचिवर्धन मिश्रा मध्यप्रदेश काडर की आईपीएस अधिकारी हैं . वे कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अफसर होने के अलावा बेहतरीन वक्ता और लेखिका भी हैं यहाँ उन पर केन्द्रित ए पी दुरई की आने वाली पुस्तक से उद्दृत आध्यात्मिकता  के अंश दिए गये हैं .

आध्यात्मिकता से मेरा परिचय एक बहुत ही साधारण घटना थी, क्योंकि मैंने 18 साल की उम्र में अपने चाचा के आग्रह पर ध्यान करना शुरू किया था। आध्यात्मिकता के बीज बोए जा चुके थे, लेकिन अंकुरित होने में कुछ समय लगा। मुझे इसकी ज़रूरत तब महसूस हुई जब मैं यू.पी.एस.सी. परीक्षाओं के लिए तैयारी कर रही थी, साथ में अपने कॉलेज के दिनों में भ्रमित दोस्ती के कारण उथल-पुथल से गुजर रही थी | एक दिन शाम के ध्यान के दौरान मेरा दिल खिल उठा और उसने मेरे जीवन को आंतरिक सौंदर्य, ख़ुशी तथा ज्ञान से भर दिया | मुझे यह खुलासा हुआ कि समग्र ख़ुशी का स्रोत हमारे हृदय में ही निहित है | मैं तुरंत समझ गयी कि हार्टफुलनेस ध्यान मेरे जीवन में एक स्थायी चीज़ बनने वाला है, और वे चीज़ें भी जो अभी तक प्रकट नहीं हुई हैं |

मैंने अपने यूपीएससी साक्षात्कार प्रपत्र में ‘ध्यान’ का उल्लेख एक शौक के रूप में किया, इसलिए स्पष्ट रूप से साक्षात्कार के दौरान हार्टफुलनेस ध्यान के मेरे अभ्यास के बारे में कई सवाल पूछे गए | मैंने उन सवालों के जवाब आत्मविश्वास के साथ, हंसमुख और शांत रह कर दिए | मैं उन गुणों का श्रेय ध्यान को देती हूँ, लेकिन मुझे जल्द ही एहसास हो गया कि पुलिस अधिकारी के चुनौतीपूर्ण पेशे में बहुत कठिन प्रश्नों का उत्तर देना होगा।

शुक्र है कि मेरा परिचय आध्यात्मिकता से हो गया | मैं जिस भी मार्ग का अनुसरण कर रही थी, उसमें मुझे जीवन का उद्देश्य समझ आने लगा; इसलिए, पुलिस के साथ काम करना मेरे लिए एक आशीर्वाद था, मेरे लिए एक नियुक्त व नियत मार्ग के रूप में , जिसमें मैं अपनी सर्वोत्तम क्षमता तक समाज के लिए योगदान दे सकी | मैंने राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में अपने प्रशिक्षण के दौरान पूरे दिल से काम किया। ध्यान हमें हर पल में मौजूद रहने के लिए तैयार करता है | मेरा मानना है कि इसी कारण से मुझे 2006 के बैच में प्रथम स्थान मिलने पर सरदार वल्लभ भाई पटेल ट्रॉफी से सम्मानित किया गया |

हालाँकि, मेरे दोस्त, माता-पिता और रिश्तेदार चाहते थे कि मैं आईएएस के लिए फिर से यू पी एस सी की परिक्षा दूँ लेकिन मैंने अपने हृदय से परामर्श लिया और भारतीय पुलिस सेवा में रहने का फैसला किया क्योंकि ध्यान ने मुझे दूसरों की धारणाओं एवं अपेक्षाओं के आधार पर जीवन निर्णय लेने के बजाय अपने अंदर की गहराई में जाकर हृदय की सच्ची पुकार का अनुसरण करने की हिम्मत दी। बाहरी और आंतरिक मानसिक गड़बड़ी के बीच हृदय को सुनना, अपने स्वयं के मूल्यों के अनुसार निर्णय के भले और बुरे का विश्लेषण करना, और फिर किसी फैसले पर पहुँचना, उसकी घोषणा करना और उसे लागू करना, भले ही वह समाज के मानदंडों या अपेक्षाओं के खिलाफ हो, यह सब जीवन बदलने वाली कला है जो हार्टफुलनेस ध्यान के साथ आती है। साहस छोटी-छोटी चीज़ों में परिलक्षित होता है जो शायद दूसरों के लिए आसान न हो लेकिन एक सादगीपूर्ण हृदय और स्पष्ट विवेक के साथ हम खुशी से और आसानी से मार्ग पर बढ़ सकते हैं।

हार्टफुलनेस ध्यान में हम हृदय पर फोकस करते हैं, इस विचार के साथ कि दिव्य प्रकाश हमारे हृदय में मौजूद है। प्राणाहुति की मदद से, हम ध्यान में लीन हो जाते हैं। ‘सफाई’ का अभ्यास छापों को बाहर निकलता है और अवांछित प्रभावों से दिमाग को मुक्त करता है, जो स्पष्ट विवेक प्राप्त करने में मदद करता है। ‘प्रार्थना’ का तीसरा तत्व हमें दिव्य सहयोग से जोड़ता है। मेरे पेशे में, हर दिन मुझे नागरिकों के सार्वजानिक और व्यक्तिगत जीवन में कई तरह की नकारात्मकता से निपटना पड़ता है : कानून-पालनकर्ता और कानून-तोड़ने वालों से, पीड़ितों और अपराधियों से, अव्यवस्था एवं अपराधों से पीड़ित परिवारों और समाजों से और शोकपूर्ण व आतंक, अराजकता व भ्रम, भय व जटिलताएँ, सही व गलत, भ्रष्टाचार व गन्दगी आदि की परिस्थितियों से| हम पुलिस अधिकारियों को दृढ़, अप्रभावित और निष्पक्ष रहने और साथ ही मानवीय, दयालु, धर्मी, संतुलित रहने की जरूरत है। निःस्वार्थ सेवा, धैर्यपूर्वक सुनना और एक व्यावसायिक दृष्टिकोण बनाए रखना होता है | उच्चतम दर्जे की ईमानदारी अपेक्षित होती है। सबसे ऊपर, हमें विकट संकट के क्षणों में दिव्य सहायता की आवश्यकता होती है। हार्टफुलनेस विधि इन चुनौतियों का समाधान है।

असंयत भीड़ के रोष की एक घटना में, मैं बहुत कम पुलिसकर्मियों के साथ थी | हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने हमें घेर रखा था जो पुलिस तथा प्रशासन के खिलाफ नारे लगा रहे थे | उस पल में, मुझे हार्टफुलनेस की शक्ति का एहसास हुआ जब मैंने खुद को साहस से भरा पाया,क्योंकि मैं अपने दिल में जानती थी कि मैं कानूनन सही थी और मुझे प्रदर्शनकारियों की प्रतिक्रिया देख कर परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं थी | मैंने उस राजनीतिक संगठन के वृद्ध और बहुत वरिष्ठ नेता के प्रति आत्म-विश्वास के साथ, शांत और आदर भाव रखते हुए उन्हें बता दिया कि पुलिस उनकी नाजायज़ मांगों को पूरा नहीं होने दे सकती | यह इतने स्पष्ट, दृढ़ और सम्मानजनक शब्दों में कहा गया था कि मैंने उस पल में खुद को देखा और इस तरह की परिस्थितियों में मुझे इस अभ्यास की शक्ति दिखाने के लिए मैंने अपने आध्यात्मिक मार्गदर्शक को धन्यवाद दिया | वे बिल्कुल स्पष्ट शब्द थे, एक दृढ़ विश्वास था जिसे मैंने लोगों के उस जूनून तथा आक्रोशपूर्ण भावनाओं के मध्य अपने हृदय की गहराइयों से सुना | यह मेरे दैनिक ध्यान के अभ्यास की वजह से संभव हुआ | इसका अर्थ यह नहीं है कि उस स्थिति का अंत मेरे पक्ष में हुआ |

अब तक मेरे पूरे करियर में कई क्षणों में मैंने देखा है कि ध्यान ने मुझे बहुत कुछ दिया है : गहरी अंतर्दृष्टि, स्पष्ट विवेक, निःस्वार्थ सेवा की प्रवृत्ति, विनम्रता, मनोदशा और क्रोध पर नियंत्रण, चारों ओर होने वाली हर चीज में आध्यात्मिक उद्देश्य, स्वीकार करने की अवस्था, शांति, पूर्णता प्राप्त करने के लिए प्रेरणा , तनाव प्रबंधन, हृदय की ख़ुशी, अनुशासन, और नाम या प्रसिद्धि, फ़ायदा लेने या अवैध पैसा लेने की कम इच्छाएँ आदि। इसने मुझे जीवन का उद्देश्य एवं संतुलन दिया है। मैं अपने मित्रों और सहकर्मियों को हार्टफुलनेस ध्यान के ज़बरदस्त लाभों का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करती हूँ ताकि वे एक करियर के रूप में भारतीय पुलिस सेवा में कार्यरत रहते हुए एक प्रसन्नतापूर्ण और संतोषजनक जीवन जीएँ|

ए पी दुरई की आने वाली पुस्तक से उद्दृत है जिसका शीर्षक है – सूत्र फॉर सुपर कॉप्स : द स्टेट ऑफ द हार्ट पुलिसिंग

By: Ruchi Vardhan Misra, Madhya Pradesh, India

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