उन्नाव दुष्कर्म :पीडिता की मौत के बाद उबला देश ,पिता ने कहा, हमारे घर पर गिरा दो बम

नई दिल्ली. उन्नाव की दुष्कर्म पीड़ित को इंसाफ दिलाने के लिए शनिवार को दिल्ली में प्रदर्शन हुआ। देर शाम सैकड़ों लोग कैंडल मार्च में शामिल हुए। वे राजघाट से इंडिया गेट की ओर जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने बेरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को बीच में ही रोक दिया। पुलिस ने उन पर पानी की बौछार की। इस मार्च में दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के समर्थक भी थे। स्वाति दुष्कर्म के दोषियों को फांसी की मांग को लेकर बीते 5 दिन से राजघाट पर अनशन कर रही हैं।

90% जली उन्नाव की पीड़ित का शुक्रवार रात सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान कॉर्डियक अरेस्ट से निधन हो गया था। इससे दुखी एक महिला ने अस्पताल के बाहर अपनी नाबालिग बेटी को ज्वलनशील पदार्थ डालकर जलाने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए लड़की को सुरक्षित बचा लिया। पुलिस के मुताबिक, महिला उन्नाव की पीड़ित के लिए इंसाफ की मांग कर रही थी। उसने ‘हम न्याय चाहते हैं’ के नारे भी लगाए। महिला के बरामद ज्वलनशील पदार्थ जांच के लिए भेजा गया है।

पुलिस की अपील- प्रदर्शनकारी राजघाट लौट जाएं

कैंडल मार्च निकाल रहे प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछार करने के लेकर दिल्ली पुलिस के पीआरओ एमएस रंधावा ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी जलती हुई चीजों को पुलिस की ओर फेंक रहे थे। उन्हें काबू करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों को इंडिया गेट की ओर जाने की अनुमति नहीं है। इसलिए उन्हें प्रदर्शन वाली जगह (राजघाट) पर लौटना चाहिए।

दुष्कर्म के आरोपियों ने पीड़िता को जला दिया था

3 दिसंबर को जमानत पर छूटे दुष्कर्म के आरोपियों ने उन्नाव में गुरुवार को पीड़ित को जला दिया था। वह जलते शरीर के साथ एक किमी तक भागी और लोगों की मदद से पुलिस को आपबीती बताई थी। शुक्रवार रात दिल्ली में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया, ‘‘पीड़ित पूछ रही थी कि वह बच तो पाएगी? वह जीना चाहती थी। उसने भाई से कहा था कि उसके गुनहगार बचने नहीं चाहिए।’’ पांचों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए थे। इनमें से दो वही हैं, जिन्होंने उसके साथ दुष्कर्म किया था।

 पीड़ित के गांव में नेताओं का जमावड़ा, तमाशबीनों की भीड़ जमा

उन्नाव से करीब 50 किमी दूर बिहार थाना क्षेत्र में पड़ने वाले हिन्दूनगर गांव में शनिवार दिनभर लोगों का हुजूम था। 90% झुलसने के बाद दम तोड़ चुकी दुष्कर्म पीड़ित का शव दिल्ली से उसके गांव पहुंचा नहीं था। गांव में घुसते ही पुलिस, मीडिया और नेताओं की दर्जनों गाड़ियां खड़ी दिखाई देती हैं। लगभग 100 मीटर दूर पीड़ित का फूस से ढंका हुआ मिट्टी का घर है। घर के बाहर 50 से ज्यादा पुलिस वाले खड़े हैं। अंदर एक-एक कर मीडिया वाले पीड़ित के पिता से  बात कर रहे हैं। पिता थके-थके से लग रहे हैं, फिर भी पानी पी-पीकर मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे हैं। सिर पर आंचल डाले बहू उनसे कह रही है कि तबीयत खराब हो जाएगी आप कमरे में चल कर आराम कर लीजिए। पीड़ित के पिता कहते हैं- दो दिन से खाना-पीना हराम है। अब तो बेटी भी नहीं रही।

‘हत्यारों को फांसी दो नहीं तो हमारे घर पर बम फोड़ दो’

बातचीत में पिता कहते हैं कि हमारे यहां अब नेता आ रहे हैं, मीडिया वाले आ रहे हैं, लेकिन नही आएगी तो सिर्फ मेरी बेटी। पिछले दो दिनों से मैंने उसको सिर्फ टीवी और इंटरनेट पर ही देखा है। पिता कहते हैं कि या तो हत्यारों को फांसी दो या हैदराबाद की तरह उनका एनकाउंटर कर दो। ये सब न हो पाए, तो हमारे घर पर बम गिरा दो, जिससे हम ही खत्म हो जाएं। मेरे पास अब कोर्ट-कचहरी दौड़ने की ताकत नहीं बची।

प्रधान का समर्थक था पीड़ित का परिवार 

पीड़ित के पिता ने कहा, ”हम लोगों की कोई पुरानी दुश्मनी नहीं थी। हम पहले प्रधान के समर्थक ही थे। तन, मन, धन से उनके साथ रहते थे। उनके जरिए ही हमें कई योजनाओं का जल्दी फायदा भी मिला, लेकिन जब से यह मामला सामने आया, तब से संबंध खराब हुए। दबंग होने की वजह से प्रधान परिवार ने हमें दबाने की कोशिश की। मेरी बेटी और उसकी मां को मारा-पीटा भी। अब मेरी बेटी को जला दिया।”

प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ मामला

पिता के मुताबिक, 2017 में शिवम का घर आना-जाना शुरू हुआ। गांव का लड़का होने के कारण किसी को उसके आने-जाने से कोई आपत्ति नहीं हुई। लेकिन, जब बेटी और उसके संबंधों के बारे में पता चला, तो शिवम के परिवार ने घर आकर दबंगई दिखाई। इसके बाद भी शिवम ने बेटी से संबंध खत्म नहीं किए। दिसंबर 2017 में वो मेरी बेटी को भगा ले गया। बाद में पता चला कि बेटी को रायबरेली लेकर गया है। उसने बेटी को गुमराह करने के लिए गलत कागजात बनवा कर शादी का झांसा दिया और उससे रेप करता रहा। परिवार के दबाव में करीब दो महीने बाद गांव लौटकर उसने मेरी बेटी से रिश्ता खत्म कर दिया। इस दौरान उसने मोबाइल से बेटी का वीडियो बना लिया था। बदनामी के कारण मेरी बेटी अपनी बुआ के यहां रायबरेली रहने चली गई। पिछले साल इसी दिसंबर में शिवम अपने रिश्तेदार शुभम के साथ रायबरेली पहुंचा और मंदिर में शादी का झांसा देकर उसे बुलाया। बेटी ने बताया था कि उसने वहां शादी तो नहीं की, लेकिन उसके साथ दोनों ने हथियार के दम पर दुष्कर्म किया।

धोखा मिलने के बाद संघर्ष शुरू हुआ

पिता ने बताया- जब धोखा मिला, तो बेटी ने मामला दर्ज करवाने के लिए भागदौड़ करनी शुरू की। हम थाने के चक्कर काटते रहे, लेकिन कोई मुकदमा नहीं दर्ज हुआ। फिर कोर्ट के आदेश पर मार्च 2019 में मुकदमा दर्ज हुआ। लड़कों की गिरफ्तारी के लिए पैरवी करते रहे, तब कहीं सितंबर में शिवम जेल गया, लेकिन समय से पहले उसे जमानत मिल गई। जमानत मिलते ही सबने मिलकर मेरी बेटी को मार दिया।

गांव में बाहरी लोगों की भीड़, स्थानीय लोगों ने चुप्पी साधी

पीड़ित के पड़ोंसियों ने मामले पर चुप्पी साध रखी है। मामला मीडिया में उछलने के बाद, आसपास के ग्रामीण पीड़ित के गांव पहुंच रहे हैं। बगल के गांव से आए लोग कहते हैं कि यहां कौन बोलेगा। सबको डर भी लगता है। आज मीडिया और पुलिस है, कल कोई नहीं रहेगा, तो फिर गरीब को कौन बचाएगा।

गांव के मुहाने पर ही बैठा है आरोपियों का परिवार

मीडिया और नेताओं की आती भीड़ देखकर सुबह से ही आरोपियों का परिवार गांव के मुहाने पर ही बैठा है। परिवार की महिलाएं लगातार रो रही हैं और मीडिया वालों से कह रही है कि हमारी बात भी चलाओ। शुभम की बहन ने बताया कि सब हमारा वीडियो बना रहे हैं, लेकिन कोई चैनल हमारी बात नहीं चला रहा। बहन का कहना है कि बुजुर्ग व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है। जबकि, उनकी तबीयत भी नहीं ठीक रहती। हमारे घर के बच्चे ऐसे नहीं हैं, जो कोई गंदा काम करें।

लड़की थाने के चक्कर लगाती रही

घटनास्थल से लगभग डेढ़ किमी दूर एक घर पर दो लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रधान सामाजिक और आर्थिक रूप से सम्पन्न है। इसमें दो राय नहीं है कि पीड़ित का उत्पीड़न हुआ। वह थाने के चक्कर लगाती रही, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। बिहार थाने की पुलिस का समर्पण भी प्रधान के घर की तरफ ज्यादा रहा है। हालांकि, घटना कैसे हुई, इस सवाल पर लोग कहते हैं कि प्रधान का एक लड़का जेल होकर आया है। गांव में कहते हैं कि जब कोई जेल होकर आ जाए, तो उसका डर खत्म हो जाता है। ऐसे में कुछ भी हो सकता है।

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