इस IPS को कोचिंग में हुआ था प्यार और कर ली शादी

भोपाल. भोपाल साउथ के एसपी राहुल कुमार लोढ़ा ने सिविल सर्विसेस में जाने का फैसला ग्रेजुएशन के बाद लिया था। इंजीनियरिंग से ग्रेजुएशन करने के बाद उनकी मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब लग गई। यह नौकरी उन्होंने ज्यादा दिन तक नहीं की। एक बार बचपन के दोस्तों से बात के दौरान सिस्टम (करंट मुद्दे) को लेकर कोई बहस छिड़ी, जिस पर दोस्तों ने कहा- तुम क्यों सिस्टम को इतना गलत समझते हो। अगर कुछ सही करना है तो खुद सिस्टम में क्यों नहीं जाते हो। यही बात उनके मन में बैठ गई और वह सिविल सर्विसेस में जाने की तैयारी करने लगे और IPS बन गए।SP राहुल ने अपनी लव स्टोरी शेयर की। उन्होंने बताया. जिनसे उनकी शादी हुई वे ही उनका पहला लव थीं। उन्होंने सिविल सर्विसेस में सिलेक्ट होने से पहले मां को ये बात बताई थी। उसके बाद ही प्रपोज किया था।एसपी राहुल ने बताया, इंजीनियरिंग के बाद उन्हें दिल्ली में एक स्कॉलरशिप मिली थी। जिसके तहत कोचिंग और रहना फ्री था।

उनकी वाइफ शुभी जो जोधपुर की रहने वाली हैं, वो भी उसी स्कॉलरशिप में सिलेक्ट हुई थीं। दोनों एक ही कोचिंग में जाते थे, इसलिए दोनों एक-दूसरे को जानते थे।2 साल तक फ्रेंडशिप रही और हम लोग कई बार आपस में नोट्स भी शेयर करते थे। UPSC एग्जाम के थर्ड अटैम्ट के बाद जब मैं घर गया तो मां को शुभी के बारे में बताया। इस पर उन्होंने, तुम्हें लड़की पसंद है तो उससे बात कर लो और जो भी हो हमें बता देना।तभी मैंने कॉल पर शुभी को प्रपोज किया, जिसके कुछ समय बाद ही जवाब हां में आया। हम दोनों ने एक महीने के अंदर ही अपने-अपने घर पर इस बारे में बताया।- इसके बाद दोनों के घरवाले आपस में मिले और शादी फाइनल कर दी गई, लेकिन अभी तक मेरा रिजल्ट नहीं आया था।
राहुल ने बताया, जब 2011 में रिजल्ट आया तो उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। शुभी ने मुझे बताया कि मैं IPS में सिलेक्ट हो गया हूं।सिलेक्शन के बाद ट्रेनिंग स्टार्ट हो गई और कुछ समय बाद 2012 में हम दोनों शादी के बंधन में बंध गए।

आईटी इंजीनियर भी हैं राहुल

– राहुल लोढ़ा महाराष्ट्र के जलगांव जिले के रहने वाले हैं। उनके पिता बिजनेस करते हैं और मां हाउस वाइफ हैं। 2008 में उन्होंने BE कम्पलीट की और उसके तुरंत बाद उनकी IBM में जॉब लग गई थी।
जॉब के दौरान 2009 से सिविल सर्विस का एग्जाम देना शुरू किया। 2011 में IPS बना। राहुल ने बताया, जब IPS बनने की चाहत में मैं दिल्ली गया, उस समय तक सिविल सर्विसेस की तैयारी को लेकर कोई नॉलेज नहीं था।दिल्ली पहुंचा तो चांदनी चौक स्थित गुरूद्वारा में रातें बिताईं। इसके बाद कई दिन तक धर्मशाला में भी रहना पड़ा।किसी तरह लोगों से पूछते-पूछते कोचिंग तक पहुंचे तो लेट होने के कारण एडमिशन नहीं हुआ। लेकिन हार नहीं मानी। मैं कोचिंग से बाहर आने वाले स्टूडेंट्स से पढ़ाई के लिए जरूरी बुक्स के बारे में पूछता और उसे नोट करता था। इस तरह एग्जाम की पढ़ाई करते मैं इतना तैयार हो चुका था कि किसी भी प्रश्न के बारे में सुनकर ही बता देता था कि वो किस साल के पेपर में आया था।

 

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