इस आईएएस की वजह से हुई त्रिवेन्द्र सरकार की किरकिरी

जिस अफसर पर सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत को सबसे ज्यादा भरोसा है, उसी ने उन्हें आफत में डाल दिया है. हम बात कर रहे है 2002 बैच की आईएएस राधिका झा की. आज की तारीख में झा को सबसे ताकतवर अफसर माना जा रहा है क्योंकि वह न सिर्फ सीएम की सचिव हैं, बल्कि सबसे अहम विभाग भी सीएम त्रिवेन्द्र ने उनको दे रखे हैं.

2017 मार्च में जब त्रिवेन्द्र रावत की सरकार बनी, उस समय राधिका झा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में ऊर्जा विभाग में तैनात थीं. त्रिवेन्द्र रावत उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस उत्तराखंड लाए. सरकार में काम काज तेजी से हो, इसके लिए सीएम ने उन्हें अपना सचिव बनाया. यहां तक की सबसे अहम विभाग ऊर्जा और नगर विकास भी उन्हें सौंप दिया. लेकिन लगता है राधिका झा से कुछ भी सम्हल नहीं पा रहा है.
राज्य में निकाय चुनाव समय पर नहीं हो पा रहे हैं तो इसके पीछे राज्य निर्वाचन आयोग राधिका झा को बड़ा जिम्म्मेदार मान रहा है.

सुबर्द्धन ने साफ कहा कि 6 महीने में भी राधिका झा उनकी सीएम से मुलाकात नहीं करा पाईं. सुबर्द्धन ने कहा कि वह सीएम त्रिवेन्द्र से मिलकर निकाय चुनाव के बारे में गंभीर चर्चा करना चाहते थे. उन्होंने राधिका झा को मौखिक तौर पर सीएम से मिलाने का आग्रह किया लेकिन झा ने इसे ठुकरा दिया और पत्र लिखने की बात कही.राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि सीएम से सैकड़ों लोग रोज मिलते हैं लेकिन कितनों को पत्र भेजने पड़ता है. हैरानी तो इस बात पर हो रही है कि पिछले साल सितंबर में ही सुबर्द्धन ने सीएम से मिलने के लिए एक पत्र राधिका झा को भेज दिया था लेकिन अप्रैल 2018 तक उन्हें मिलने का समय नहीं मिला.

सीएम के सचिव होने के नाते राधिका झा की जिम्मेदारी थी कि वह मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम से राज्य निर्वाचन आयुक्त की भेंट कराती लेकिन ऐसा नहीं हो सका. इसका नतीजा ये रहा कि आज निकाय चुनाव समय पर न करने का आरोप निर्वाचन आयोग ने सरकार पर जड़ दिया.

हैरानी इस बात की भी है कि तब राधिका झा ही नगर विकास विभाग में सचिव भी थीं. सुबर्द्धन ने भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राधिका झा का नाम लिया और उन पर तोहमत मढ़ी. इस मामले को लेकर news18 ने राधिका झा से बात करनी चाही लेकिन उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया.

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