आर्थिक तंगी का बचपन , कर्ज लेकर पढ़ाई और अब कमाएंगे लाख रुपए महीना

शिवराज द्रुपद | अमृतसर//खुदीको कर बुलंद इतना, खुदा बंदे से खुद पूछे, बता तेरी रजा क्या है…’ अर्थात इंसान की बुलंदी या फिर सफलता उसके अपने ऊपर निर्भर करती है, भाग्य या फिर संसाधनों पर नहीं। तभी तो इस पंक्ति में भगवान खुद बंदे से इसकी मर्जी पूछ रहा है। इसी पंक्ति को चरितार्थ किया है इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) के पहले और दूसरे बैच के स्टूडेंट्स ने अपनी मेहनत और लगन के जरिए बड़ी कंपनियों में बड़े पैकेज पर जॉब हासिल करके। इनमें काफी स्टूडेंट ऐसे हैं, जिनका बचपन आर्थिक तंगी में बीता, लेकिन उन्होंने अपना करियर बनाने तथा पैरेंट्स का सपना पूरा करने के लिए कर्ज लेकर पढ़ाई की और अब लाख रुपए महीने तक की सैलरी पर सिलेक्ट कर लिए गए हैं।
साल 2015 से वजूद में आए सूबे के इकलौते आईआईएम के पहले बैच में देश के विभिन्न हिस्सों से 44 स्टूडेंट आए। दो साल का कोर्स पूरा करते-करते इनमें से देश की बड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में 25 को प्लेसमेंट के जरिए जॉब मिल गई है, जबकि सेकंड बैच के 105 में से 75 एडवांस में कंपनियों द्वारा अनुबंधित कर लिए गए हैं। आईआईएम के सीनियर कंसल्टेंट संजय कुमार मिश्र का कहना है कि इंसान में जज्बा हो तो कुछ भी असंभव नहीं है और इन बच्चों ने यही किया। नोडल अफसर पवन कुमार सिंह का कहना है कि आम लोग संसाधनों का रोना रोते हैं लेकिन ऐसा नहीं है, बस इंसान में सच्ची लगन होनी चाहिए।
पहले बैच से निकले कानपुर के रहने वाले आदित्य यादव खुद में एक मिसाल हैं। पिता नौकरी में थे लेकिन अब नहीं रहे। बड़े भाई टीचिंग लाइन में थे, मगर पिता के निधन के बाद घर गए। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी लेकिन जैसे-तैसे बीटेक आईटी किया और खर्च निकालने के लिए कोचिंग किया करते थे। इसके बाद एक प्राइवेट फर्म में जॉब किया। इसी दौरान कैट की परीक्षा दी और सिलेक्ट हो गए। आगे पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे, नतीजतन बैंक से 10.50 लाख रुपए का एजुकेशनल लोन लिया और यहां गए। दो साल की पढ़ाई खत्म होते-होते उनको ग्रुप एम कंपनी में 75,000 रुपए महीने की नौकरी मिल गई है। इसी तरह से हैदराबाद के साईंराम भी आम परिवार से हैं और 12 लाख रुपए एजुकेशनल लोन लेकर पढ़ाई की और अब करीब एक लाख 40 हजार रुपए की नौकरी के लिए सिलेक्ट किए गए हैं। रोहतक की हिमानी, कानपुर के कृष्णा चौरसिया, राजस्थान के दर्शन शर्मा, गुजरात के रोशन ऐसे नाम हैं, जिन्होंने आम परिवार से निकल कर देश की बड़ी कंपनियों में जगह बनाई है।
एजुकेशनल लोन पर कम हो ब्याज दर
नोडलअफसर के पीए ललित भल्ला तथा सहायक यशपाल अवस्थी का कहना है कि आमतौर पर लोग एजुकेशनल लोन लेने में डरते हैं। इसका यह भी कारण है कि काफी बैंकों की पालिसी सही नहीं है। इन लोगों का कहना है कि होम लोन पर ब्याज दर 8.75 फीसदी है, जबकि एजुकेशनल लोन पर सीधे 10 फीसदी। इसे काफी कम किया जाना चाहिए ताकि दूसरे बच्चे भी आगे सकें।

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