आईएएस बनने का जुनून इस क़दर था कि सिविल सेवा की दुबारा दी परीक्षा और पास हुए

केशव तिवारी सतना से  लौटकर ////
दिव्यांक सिंह मध्यप्रेदश के उन चुनिंदा आईएएस में शुमार हैं जिन्होंने प्रतियोगिताओं को अपनी काबिलियत के करिश्मे से अपने कदमों में लाकर रख दिया ।    गांधीनगर आईआईटी से  केमिकल इंजिनयरिंग करने के बाद दिव्यांक सिंह ने सिविल सेवा दी और आईपीएस में चयनित हुए । एक साल प्रशिक्षण भी लिया लेकिन आईएएस बनने का जुनून दिल दिमाग में इस क़दर हावी था कि सिविल सेवा की दुबारा परीक्षा दी और चयनित हुए । दिव्यांक सिंह मध्य प्रदेश के शायद इकलौते आईएएस होंगे जिन्होंने आईपीएस का भी पूरा प्रशिक्षण लिया है । जिसके चलते उन्हें पुलिस से भी समन्वय स्थापित करने में सहूलियत मिलती है ।
अब तक का सफर
आईएएस का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद दिव्यांक सिंह कुंभराज में तहसीलदार और गुना में सहायक कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दी । इसके बाद दिल्ली में सहायक सचिव के रूप में नीति आयोग में काम किया । इसके बाद सतना जिले के नागौद और तहसील के वर्तमान में  एसडीएम हैं । दिव्यांक सिंह की प्रारंभिक शिक्षा मध्य प्रदेश के कई जिलों में हुई । 10 वीं और बारहवीं की परीक्षा दिव्यांक सिंह ने भोपाल के जवाहर लाल स्कूल से दी । दिव्यांक सिंह पढ़ने के लिए बोस्टन भी गए । लेकिन उन्हें विदेशी राग रंग रास नहीं आया औऱ वे भारत लौट कर अपनी सरजमी के लिए ही अपना श्रेष्ठ देना बेहतर समझा ।
राजनैतिक दबाव महसूस नहीं किया
एक सवाल के जवाब में दिव्यांक सिंह ने कहा कि मुझे  कामकाज के दौरान राजनैतिक दबाव महसूस नहीं हुआ । जो कार्य नियम कानून के दायरे में रहकर किये जा सकते हैं उन्हें करता हूँ , जो नहीं हो सकते उस संबंध में नेताओं को बता देता हूँ कि ये कार्य संभव नहीं है ।  लेकिन नेता हमेशा गलत कार्य के लिए ही दबाव देते हैं ऐसा नहीं है ।  उनका भी अनुभव जनता के लिए हितकारी होता है । कई बार नेताओं के अनुभव का जनता को बड़ा लाभ मिलता है नेता अधिकारी के प्रतिद्वंदी नहीं है   उनकी बातों में भी सार होता है , नेताओं की मदद से  भी काफी चीजें आसान हो जाती हैं ।
तुम्हारा सलेक्शन नहीं हो सकता
दिव्यांक सिंह देखने मे जितने शांत,सहज,और सरल दिखाई देते हैं वे विद्यार्थी जीवन में काफी चंचल थे , जिसके चलते वे दिल्ली की जिस कोचिंग में पढ़ते थे उस कोचिंग के संचालक ने दिव्यांक सिंह की चंचलता देख कर कह दिया था कि कुछ भी तुहारा सलेक्शन आईएएस में नहीं हो सकता ।
तीसरी पीढ़ी सिविल सर्विसेज में
दिव्यांक सिंह जब आईएएस के लिए चुने गए तो उनके घर में खुशी जैसा कोई माहौल नहीं था ,क्योकिदिव्यांक सिंह के पहले भी उनके खानदान से 7 लोग सिविल सर्विसेज में थे । दिव्यांग तीसरी पीढ़ी में 8 वें आईएएस के रूप में चुने गए । दिव्यांक सिंह के पिता महेंद्र सिंह जी भी 86 बैच के आईएफएस  हैं ।
आफ ट्रैक फिल्में पसंद हैं
दिव्यांक सिंह को ज्यादातर आफ़ ट्रैक फिल्में पसंद हैं । उनके पसंदीदा हीरो आयुष्मान खुराना हैं । उन्होंने कभी खुशी कभी गम और नायक फिल्में कई बार देखी हैं ।
चाहत जिंदगी बन गई 
जब मैं आईपीएस की ट्रेनिंग कर रहा था तभी आईपीएस की ट्रेनिंग के लिए हितिका वासल आईं और उनसे बातचीत शुरू हो गई । बातों ही बातों में हम एक दूसरे के इतने नजदीक आ गए कि पता ही नहीं चला । हितिका वासल पंजाब की रहने वाली हैं और उनके परिवार से कोई नौकरी में नहीं था । शादी की बातचीत दोनो परिवारों में शुरू हुई और अंततः हम हमेशा के लिए एक दूसरे के हो गए । दिव्यांक सिंह की पत्नी हितिका वासल भी आईपीएस हैं । पहले राजस्थान कैडर में थी लेकिन कुछ दिनों पूर्व ही उन्हें भी मध्य प्रदेश कैडर मिल गया ।
सतना के लोग जागरूक
सतना के लोग काफी जागरूक हैं कभी कभी इनकी जागरूकता शिकायती भी हो जाती है । कोई भी अधिकारी सतना जिले की जनता के अधिकारों से खिलवाड़ नहीं कर सकता ।

One thought on “आईएएस बनने का जुनून इस क़दर था कि सिविल सेवा की दुबारा दी परीक्षा और पास हुए

  • March 5, 2020 at 11:33 am
    Permalink

    पहले केमिकल इंजीनियरिंग, आईपीएस फिर आईएएस मे चयनित होना मानो प्रतिभा कूट-कूटकर भरी है,ऐसे योग्य अधिकारियो का राजनीतिक दबाव बर्दाश्त ना करने की काबिलियत सोने पर सुहागा है।

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