अखिलेश सरकार के साढ़े चार साल में चौथे मुख्य सचिव राहुल भटनागर बोले ,”यह फैसला सरकार का”

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राहुल भटनागर अखिलेश सरकार के साढ़े चार साल में चौथे मुख्य सचिव हैं। जावेद उस्मानी, आलोक रंजन और दीपक सिंघल के बाद उन्हें अफसरशाही की यह सबसे बड़ी कुर्सी मिली है।खास बात यह कि भटनागर को यह जिम्मेदारी सत्ता में मजबूत पकड़ रखने वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीपक सिंघल को हटाकर और यूपी कॉडर के 26 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को नजरंदाज कर दी गई है।
भटनागर पर उम्मीदों का बोझ इसलिए भी ज्यादा होगा क्योंकि बतौर प्रमुख सचिव वित्त तमाम विपरीत हालात के बावजूद वह मुख्यमंत्री की उम्मीदों पर खरे उतरे हैं। पर, यह कुर्सी उन्हें ऐसे वक्त मिली है जब चुनाव सिर पर हैं और काम के लिए बहुम कम समय बचा है।
कानून-व्यवस्था में सुधार के तमाम दावों के बावजूद इस मोर्चे पर सरकार की स्थिति ठीक नहीं है। 1983 बैच के आईएएस अधिकारी भटनागर से इन्हीं अपेक्षाओं और चुनौतियों को लेकर बात की तो उन्होंने खुलकर जवाब दिए। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश:
सवाल: जिन हालात में आपको मुख्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, उसमें आपसे मुख्यमंत्री की अपेक्षाएं कुछ ज्यादा ही होंगी?

जवाब : मुख्यमंत्री की अपेक्षा है कि कानून-व्यवस्था दुरुस्त हो। समाज में सौहार्दपूर्ण वातावरण हो। अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान दिखे और उसके लिए उन्होंने जो ढेरों काम किए हैं, उसकी आमजन को जानकारी हो और वह उन तक पहुंचे। जिन डवलपमेंट प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है वे तय समय पर पूरे हों। मुख्यमंत्री की इन सभी अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा से काम करूंगा।

सवाल : कानून-व्यवस्था सरकार की दुखती रग है। इसे सरकार भी मान रही है। मुख्यमंत्री ने हाल में ही कानून-व्यवस्था पर प्रशासनिक व पुलिस अफसरों के साथ बैठक में इस चुनौती की चर्चा की। आप इसे दुरुस्त करने के लिए क्या खास करेंगे?

जवाब : मेरा मानना है कि यदि थाने की पुलिस का व्यवहार ठीक हो तो तमाम समस्याओं का समाधान अपने आप हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कुछ दिन पहले ही इस मुद्दे पर प्रदेश भर के कलेक्टर और पुलिस अफसरों को बताया है। उनके निर्देशों का थाने तक अमल हो इसके लिए मैं व्यक्तिगत रूप से भी ध्यान दूंगा। कानून-व्यवस्था में सुधार के लिए संस्थागत पहल बहुत जरूरी है। डायल-100 के रूप में सरकार ने बेहद ठोस पहल की है। इससे आने वाले दिनों में बड़ा सुधार दिखेगा।

सवाल : चुनाव के पहले तनाव बढ़ जाते हैं। लोकसभा चुनाव के पहले मुजफ्फरनगर में दंगे हो गए। प्रदेश में फिर ऐसी स्थितियां न पैदा हों, इसके लिए क्या कदम उठाएंगे?

rahul-bhatnagar-ias-in-sideजवाब : छोटी-छोटी सूचनाओं और घटनाओं को फील्ड के अधिकारी पूरी जिम्मेदारी से लें तो बड़ी घटनाओं की आशंका कम हो जाती है। मसलन, यदि कहीं से वाद-विवाद की सूचना थाने पर आई तो उसे पूरी संवेदनशीलता से लें। हल्का मान कर उसे टालें नहीं। संवेदनशील स्थिति लगे तो तत्काल अपने से वरिष्ठ अधिकारी को बताएं। मेरा विचार है कि इससे स्थितियां सामान्य रखने में मदद मिलेगी। मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यदि पीड़ित को प्रताड़ित करने की बात कहीं सामने आई तो जो भी जिम्मेदार होगा, उसकी जवाबदेही निश्चित रूप से तय होगी। यह बात ध्यान में रखी जाए तो कहीं भी स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं होगी।

सवाल : चुनाव पूर्व कई कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाए हुए हैं। देखा जा रहा है कि कई जायज मांगों पर भी अफसरशाही कुंडली मारे बैठी है।

जवाब : मुख्यमंत्री जी कर्मचारियों के प्रति बेहद उदार रहे हैं। कर्मचारी को पता है कि इस सरकार ने उन्हें पदोन्नति के भरपूर अवसर दिए। एसीपी की विसंगतियां दूर की। रिक्त पदों को भरने का काम लगातार चल रहा है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए राज्य वेतन समिति का गठन हो चुका है। इसके बावजूद कर्मचारियों की जो भी जायज मांगें होंगी, नियमों के दायरे में सुनी जाएंसवाल : राजधानी में आए दिन धरना-प्रदर्शन और जाम की नौबत आती रहती है। आप इन स्थितियों से कैसे निपटेंगे?

जवाब : अफसरों को मेरी सलाह है कि कहीं धरना-प्रदर्शन की नोटिस आए तो उसके तथ्यों पर पहले ही गौर कर लें। यदि समाधान संभव है तो समय रहते करा दें। यदि वक्त लगने की संभावना हो तो स्पष्ट बता दें। नियम-कायदे से न मानने लायक हो तो तथ्य स्पष्ट कर दें। इससे तमाम मामले प्रारंभिक स्तर पर ही सुलझ जाएंगे। धरने-प्रदर्शन की नौबत कम आएगी। धरने के दिन नोटिस देखने की आदत बदलनी चाहिए। मांग करने वाले भी जिम्मेदार लोग हैं, तथ्य पता चलने पर वे भी सहमत हो सकते हैं।

rahul-bhatnagar-iasसवाल : आपको 26 वरिष्ठ अधिकारियों को नजरंदाज कर मुख्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई। क्या आप मानसिक रूप से इसके लिए तैयार थे?

जवाब : किस अधिकारी को क्या जिम्मेदारी दी जाए, यह फैसला सरकार का होता है। अधिकारी को उसका पालन करना होता है। मैंने नई जिम्मेदारी का काम शुरू कर दिया है। प्रशासनिक अधिकारी समय के हिसाब से अपने कार्य व दायित्व के प्रति तैयार रहते हैं। अपनी पूरी क्षमता के साथ नई जिम्मेदारी निभाने का प्रयास करूंगा।

सवाल : हाल के दिनों में सत्ता और विपक्ष की ओर से अफसरों पर आरोप-प्रत्यारोप बढ़े हैं। अफसरों से क्या कहना चाहेंगे?

जवाब : अफसरों-कर्मचारियों को आम लोगों में यह विश्वास पैदा करना होगा कि वे निष्पक्ष और उनके प्रति बेहद संवेदनशील हैं। साधारण व्यक्ति में यह विश्वास होना चाहिए कि सरकार के अधिकारी व कर्मचारी मेरे लिए हैं। मैं स्पष्ट कर दूं कि गड़बड़ी करने वालों पर एक्शन होगा और बेहतर काम करने वालों को भरपूर प्रोत्साहन मिलेगा।

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